Khudavand Muzhe Kalvari tu Dikha De ख़ुदावंद मुझे कलवरी तू दिखा दे

ख़ुदावंद मुझे कलवरी तू दिखा दे
मेरी ज़िंदगी से गुनाह को मिटा दे
 
मोहब्बत को तेरी, मैं गहरे में जानूँ
जो तूने कही है, वो हर बात मानूँ
मेरी आँखों पर से तू पर्दा हटा दे
ख़ुदावंद मुझे कलवरी तू दिखा दे
 
मैं अपने गुनाह को, ना तुझसे छुपाऊँ
मैं सूली के नीचे, जा आँसू बहाऊँ
हलीमी की राह पे चलना सिखा दे
ख़ुदावंद मुझे कलवरी तू दिखा दे
 
ना इंसान की तारीफ़, पे मेरी नज़र हो
वो सूली पे तेरी, ही मेरा फ़ख़र हो
मुझे ऐसा अपने फ़ज़ल से बना दे
ख़ुदावंद मुझे कलवरी तू दिखा दे
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